Soybean : किसान भाइयों को सोयाबीन की यह किस्में देंगी बम्पर पैदावार, किसानों को होंगा तगड़ा मुनाफा

0
soybean variety

Soybean : किसान भाइयों को सोयाबीन की यह किस्में देंगी बम्पर पैदावार, किसानों को होंगा तगड़ा मुनाफा। अब खरीफ का सीजन आने वाला है। किसान भाई सबसे ज्यादा खरीफ सीजन में सोयाबीन की खेती करते है। सोयाबीन की खेती में अधिकतम मुनाफा तभी कमाया जा सकता है जब उन्नत किस्मों के बीज बोए जाएं। किसान ऐसी सोयाबीन की किस्म का चुनाव करता है जो की अधिक पैदावार दे।

यह भी पढ़िए – कंटाप लुक में Maruti की खटिया खड़ी करने आ रही है Mahindra Bolero, दमदार इंजन और फीचर्स से मार्केट में मचायेंगी बवाल

अच्छी किस्म देती है अधिक पैदावार

सोयाबीन की अच्छी किस्म आपको भम्फर पैदावार देती है। इसलिए आज हम आपको आरवीएसएम प्रजाति की उन्नत किस्मों के विषय में बताएंगे यह इसमें रोग प्रतिरोधक होने के साथ ही कम अवधि में पकती है इससे पैदावार अधिक होती है। जो की किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।

यह भी पढ़िए – MP Board Result : MP Board 10th और 12th का रिजल्ट हुआ घोषित, इस लिंक पर देख सकते है सबसे तेज रिजल्ट

सोयाबीन आरवीएसएम-18 (प्रज्ञा): (आर.वी.एस. 2001-18)

आपको बता दे कि राजमाता सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय द्वारा हाल ही में वर्ष 2017 में जारी इस किस्म का गजट नोटिफिकेशन क्रमांक 2458 (E) दिनांक 29.08.2017 है। इस नवीनतम सोयाबीन किस्म RVSM Soybean Varieties ने अपने पहले ही उत्पादन वर्ष में अपने चमत्कारी गुणों के कारण कृषकों का दिल जीत लिया है। यह किस्म देश के मध्य क्षेत्र मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, बुंदेलखंड, मराठवाडा, विदर्भ आदि क्षेत्रों के लिए अनुशंसित की गई है।

सोयाबीन आरवीएसएम-18 (प्रज्ञा) के पकने की अवधि

सोयाबीन की आरवीएसएम-18 (प्रज्ञा) किस्म RVSM Soybean Varieties मध्यम अवधि लगभग 91-93 दिवस की होने के कारण सोयाबीन जे.एस. 9305 के लगभग पक कर तैयार हो जाएगी। मध्यम अवधि व मजबूत जड़तंत्र, फैलावदार पौधा होने के कारण कम व अधिक वर्षा तथा वर्षा के जल्दी या देर तक वर्षा होने की स्थिति बने रहने पर भी दोनों ही परिस्थितियों में समायोजन का असाधारण गुण होने के कारण कृषकों को वर्षाजन्य परिस्थितियों से नुकसान नहीं होता है व इस प्रकार की परिस्थितियों में भी कृषक को उच्च गुणवत्ता वाले अधिकतम सोयाबीन का उत्पादन प्राप्त होने की पूरी पूरी संभावना रहती है।

RVSM-18 (प्रज्ञा) की बीज दर

इस किस्म RVSM Soybean Varieties के इन गुणों को देखते हुए लगभग 70 किलो प्रति हेक्टेयर बीज दर रखने, लाइन से लाइन की दूरी 14″ से 16″ रखने, आदर्श पौधों की संख्या 4.5 से 5.5 लाख पौधों की संख्या प्रति हेक्टेयर रखने तथा आदर्श कृषि कार्यमाला अनुसार कृषि कार्य करने पर आदर्श परिणाम सामान्य परिस्थितियों में 22 से 24 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन। किंतु व्यावहारिक रूप से किसानों द्वारा गत वर्षों में लिए गए वास्तविक अधिकतम उत्पादन का आंकड़ा इस किस्म में 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर व इससे अधिक भी बताया गया है।

RVSM-18 (प्रज्ञा) की विशेषताएं

प्रमुख गुण (कैरेक्टर)- दाने का आकार गोल, मध्यम बोल्ड 100 दानों का वजन 10 से 11 ग्राम दाने का रंग पीला, चमकदार नाभिका(हायलम) का रंग काला, अंकुरण क्षमता लगभग 80 से 85%, पौधे का प्रकार मध्यम ऊंची किस्म RVSM Soybean Varieties , ऊंचाई लगभग 60 से 70 सेंटीमीटर। 1 सेंटीमीटर इनडिटरमिनेट यानी सीधा मध्यम पहला वाला पौधा सेमी इरेक्ट।

यह खासियत होती है इस किस्म की

जैसा की आपको बता दे इस किस्म की सोयाबीन की पत्तियों का आकार तीखी सकरी, फलिया रोएंदार नहीं (चिकनी), फली का रंग भूरा, तीन से चार दाने की फलियां, फलियों में चटकने (शेटरिंग) की समस्या नहीं, फूल आने की अवधि 32-36 दिवस, फूलों का रंग सफेद, पौधे की ऊंचाई अच्छी होने से हार्वेस्टर से काटने हेतु उपयुक्त। मल्टीपल रेजिस्टेंस यानी बहुरोधक किस्म होने से इस किस्म RVSM Soybean Varieties में अनेक कीट एवं बीमारियों के प्रति विशेष प्रतिरोधकता एवं सहनशीलता का गुण। विशेष रूप से यह येलो मोजेक एवं कॉलर रॉट बीमारी के प्रति सहशीलता‌।

एमएसीएस 1407 है बहुत ही अच्छी

सोयाबीन की एमएसीएस 1407 नाम की यह नई विकसित किस्म असम, पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पूर्वोत्तर राज्यों में खेती के लिए उपयुक्त है और इसके बीज वर्ष 2022 के खरीफ के मौसम के दौरान किसानों को बुवाई के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे। यह किस्म प्रति हेक्टेयर में 39 क्विंटल का पैदावार देती है और यह गर्डल बीटल, लीफ माइनर, लीफ रोलर, स्टेम फ्लाई, एफिड्स, व्हाइट फ्लाई और डिफोलिएटर जैसे प्रमुख कीट-पतंगों के लिए प्रतिरोधी किस्म है।

एमएसीएस 1407 की विशेषता

इसका मोटा तना, जमीन से ऊपर (7 सेमी) फली सम्मिलन और फली बिखरने का प्रतिरोधी होना इसे यांत्रिक कटाई के लिए भी उपयुक्त बनाता है। यह किस्म पूर्वोत्तर भारत की वर्षा आधारित परिस्थितियों के लिए उपयुक्त है। सोयाबीन की यह किस्म बिना किसी उपज हानि के 20 जून से 5 जुलाई के दौरान बुआई के लिए अत्यधिक अनुकूल है। यह इसे अन्य किस्मों की तुलना में मानसून की अनिश्चितताओं का अधिक प्रतिरोधी बनाता है। इस किस्म को तैयार होने में बुआई की तारीख से 104 दिन लगते हैं। इसमें सफेद रंग के फूल, पीले रंग के बीज और काले हिलम होते हैं। इसके बीजों में 19.81 प्रतिशत तेल की मात्रा, 41 प्रतिशत प्रोटीन  की मात्रा होती है। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed