सौंफ की खेती कर कम समय में कर सकते है बम्फर कमाई, बिल्कुल आसानी से की जा सकती है इसकी खेती

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सौंफ की खेती

सौंफ की खेती कर कम समय में कर सकते है बम्फर कमाई, बिल्कुल आसानी से की जा सकती है इसकी खेती। सौंफ की खेती सबसे आसान खेती है इसे करके लाखों रूपये की कमाई की जा सकती है। भारतीय मसालों में सौंफ का नाम बड़े ही शान से लिया जाता है. खुशबू और स्वाद के लिये फेमस सौंफ का इस्तेमाल भारतीय रसोई में काफी समय से किया जा रहा है. चाहे अचार, मुरब्बे का स्वाद बढ़ाना हो या हर्बल चाय से सेहत, सौंफ का किरदार बाकी मसालों से काफी अलग है. सौंफ मसालों के अलावा औषधीय रूप में भी उगाई जाती है, जिससे वात, पित्त और कफ तीनों से जुड़ी समस्याओं को दूर कर सकते हैं. देश में इसकी व्यावसायिक खेती बड़े पैमाने पर की जा रही है. यह कम समय और कम जमीन में भी किसानों के लिये बंपर पैसा कमाने का जरिया बन सकता है.

सौंफ की खेती का तरीका

  • सौंफ की खेती खरीफ एवं रबी दोनों ही मौसम में की जा सकती है। लेकिन रबी का मौसम सौंफ की खेती करने से अधिक उत्पादन प्राप्त होता है।
  • खरीफ में इसकी बुवाई जुलाई माह में तथा रबी के सीजन में इसकी बुवाई अक्टूबर के आखिरी सप्ताह से लेकर नवंबर के प्रथम सप्ताह तक की जा सकती है।
  • मसाला फसल संसोधन केंद्र जगुदन के अनुसार सौंफ की खेती करते समय 4 से 5 किलो /हेक्टेयर के हिसाब से बीज की बुवाई करनी चाहिए।
  • बीजों को उपचारित करके ही बोना चाहिए क्योंकि सौंफ की फसल जिससे इसका अच्छा उत्पादन मिल सके।
  • बीज को बुवाई पहले फफूंद नाशक दवा (कार्बेन्डाजिम अथवा केप्टान से प्रति 2.5 से 3 ग्राम /प्रति किलो बीज) से अलावा सौंफ के बीज को ट्राईकोडरमा (जैविक फफूंद नाशक प्रति 8 से 10 ग्राम/प्रति किलो बीज) से बीज को आठ घंटे उपचारित करके बुवाई करनी चाहिए।
  • कार्यक्षम सिंचाई हेतु टपक सिंचाई पद्धति का इस्तेमाल करना जरूरी है।
  • सौंफ की रबी की फसल में टपक पद्धति द्वारा सिंचाई करने के लिए 90 से.मी के अन्तराल में दो लेटरल और 60 से.मी अन्तराल के दो इमिटर, लगभग 1.2 किलो / वर्ग मीटर के दबाव वाली एवं 4 लीटर प्रति घंटा पानी के डिस्चार्ज का इस्तेमाल करना चाहिए।

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सौंफ की उन्नत किस्मे

सौंफ की बहुत सी प्रजातियां पाई जाती है जैसे कि सी.ओ.1, गुजरात फनेल 1, आर.ऍफ़ 35,आर.ऍफ़101,आर.ऍफ़125, एन पी.डी. 32 एवं एन पी.डी.186, एन पी.टी.163, एन पी. के.1, एन पी.जे.26, एन पी.जे.269 एवं एन पी.जे131, पी.ऍफ़ 35, उदयपुर ऍफ़ 31, उदयपुर ऍफ़ 32, एम्. एस.1 तथा जी.ऍफ़.1 आदि हैI

इन राज्यों में की जाती है सौंफ की खेती

सौंफ की खेती कर अच्छी खासी कमाई की जा सकती है। वैसे तो ज्यादातर राज्यों में खेत की मेड़ों पर सौंफ को उगाने के चलन है, लेकिन राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और कर्नाटक में इसकी खेती व्यावसायिक तौर पर की जाती है. इसकी बुवाई के लिये खरीफ सीजन का जुलाई माह और रबी सीजन के अक्टूबर की जलवायु उपयुक्त रहती है, लेकिन इसके बेहतर उत्पादन के लिये रबी सीजन में ज्यादा बुवाई करने का चलन है.

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सौंफ की बुवाई का समय

सौंफ लंबी अवधि की फसल है अतः रबी मौसम की शुरुआत में बुवाई कर अधिक उपज प्राप्त की जा सकती है. सौंफ की सीधे खेत में या पौधशाला में पौध तैयार कर रोपण किया जा सकता है. इसकी बुवाई के लिये अक्टूबर का प्रथम सप्ताह सर्वोत्तम रहता है. पौधशाला में बुवाई जुलाई-अगस्त माह में की जाती है एवं 45-60 दिन पश्चात पौधारोपण किया जाता है

इस समय करे सौंफ की कटाई

सौंफ के अम्बेल जब पूरी तरह विकसित होकर और बीज पूरी तरह जब पककर सूख जावे तभी गुच्छों की कटाई करनी चाहिए। कटाई के बाद एक-दो दिन धूप में सुखा देना चाहिए तथा हरा रंग रखने के लिए 8 से 10 दिन छाया में सुखाना चाहिए जिससे इसमें अनावश्यक नमी जमा न हो। हरी सौंफ प्राप्त करने हेतु फसल में जब अम्बेल के फूल आने के 30 से 40 दिन में गुच्छों की कटाई करनी चाहिए। कटाई के बाद गुच्छों को छाया में ही अच्छी तरह सुखा लेना चाहिए।

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